Kartik mas 2023: How to celebrate the main fasts and festivals of Kartik month【 कार्तिक मास 2023 : कार्तिक मास के प्रमुख व्रत और त्यौहार कैसे मनाये】

kartik mas 2023

Kartik Mas 2023 के आनंद का अनुभव करें: Kartik मास 28 अक्टूबर 2023 (शनिवार) से शुरू हो रहा है।सांस्कृतिक महत्व, उत्सवों और रीति-रिवाजों के बारे में जानें जो इस महीने को वास्तव में विशेष बनाते हैं।हिंदू पौराणिक कथाओं में निहित, Kartik महीना भगवान कृष्ण और उनकी प्रिय पत्नी राधा के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है।

भक्तों का मानना है कि इस महीने के दौरान अनुष्ठान और तपस्या करने से उन्हें दिव्य आशीर्वाद और आध्यात्मिक विकास मिलता है।यह महीना भक्ति और आत्म-खोज के बीच एक सेतु है।जैसे ही हम अक्टूबर की ठंडी हवा में प्रवेश करते हैं, Kartik मास की प्रत्याशा बढ़ जाती है।

28 अक्टूबर, 2023 को Kartik माह की शुरुआत के साथ, उत्सवों और परंपराओं का सिलसिला शुरू हो जायेगा। एक महीने तक चलने वाला यह उत्सव कई लोगों के लिए गहरा सांस्कृतिक महत्व और आध्यात्मिक महत्व रखता है।

kartik mas 2023
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Kartik mas 2023 में शुभ तिथियां

{Auspicious dates in Kartik month 2023}

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023 – पूर्णिमा

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023 – Kartik स्नान प्रारम्भ

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023 – वाल्मिकी जयंती

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023 – कोजागरा पूजा

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023 – श्री सत्यनारायण पूजा

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023 – पूर्णिमा व्रत

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023 – श्री सत्यनारायण व्रत

मंगलवार, 31 अक्टूबर 2023 – रोहिणी व्रत

बुधवार , 1 नवंबर 2023 – संकट चतुर्थी

बुधवार , 1 नवंबर 2023 – अहोई अष्टमी

रविवार, 5 नवंबर 2023 – कालाष्टमी

रविवार, 5 नवंबर 2023 – गोवत्स द्वादशी

गुरुवार, 9 नवंबर 2023 – रमा एकादशी

गुरुवार, 9 नवंबर 2023 – धनतेरस

शुक्रवार, 10 नवंबर 2023 – प्रदोष व्रत

शुक्रवार, 10 नवंबर 2023 – मासिक शिवरात्रि

शनिवार, 11 नवंबर 2023 – काली चौदस/रूप चौदस

शनिवार, 11 नवंबर 2023 – नरक चतुर्दशी

रविवार, 12 नवंबर 2023 – दिवाली/दीपावली

रविवार, 12 नवंबर 2023 – अमावस्या

सोमवार, 13 नवंबर 2023 – सोमवार व्रत

सोमवार, 13 नवंबर 2023 – अन्ना कूटा

मंगलवार, 14 नवंबर 2023 – चंद्र दर्शन

मंगलवार, 14 नवंबर 2023 – गोवर्धन पूजा

मंगलवार, 14 नवंबर 2023 – भाई दूज

बुधवार , 15 नवंबर 2023 – चतुर्थी व्रत

गुरुवार, 16 नवंबर 2023 – वृश्चिक संक्रांति

शुक्रवार, 17 नवंबर 2023 – शास्ति

शनिवार, 18 नवंबर 2023 – लाभ पंचमी

शनिवार, 18 नवंबर 2023 – छठ पूजा

रविवार, 19 नवंबर 2023 – दुर्गा अष्टमी व्रत

सोमवार , 20 नवंबर 2023 – गोपाष्टमी

सोमवार , 20 नवंबर 2023 – अक्षय नवमी

मंगलवार , 21 नवंबर 2023 – कंस वध

बुधवार , 22 नवंबर 2023 – प्रबोधिनी एकादशी

गुरुवार , 23 नवंबर 2023 – प्रदोष व्रत

शुक्रवार , 24 नवंबर 2023 – तुलसी विवाह

शुक्रवार , 24 नवंबर 2023 – विश्वेश्वर व्रत

शनिवार, 25 नवंबर 2023 – मणिकर्णिका स्नान

रविवार , 26 नवंबर 2023 – देव दिवाली

रविवार , 26 नवंबर 2023 – श्री सत्यनारायण व्रत

सोमवार , 27 नवंबर 2023 – पूर्णिमा

सोमवार , 27 नवंबर 2023 – गुरु नानक जयंती

सोमवार , 27 नवंबर 2023 – कार्तिक पूर्णिमा[kartik purnima]

सोमवार , 27 नवंबर 2023 – Kartik स्नान समाप्त

सोमवार , 27 नवंबर 2023 – श्री सत्यनारायण पूजा

सोमवार , 27 नवंबर 2023 – पूर्णिमा व्रत

सोमवार , 27 नवंबर 2023 – रोहिणी व्रत

मंगलवार , 28 नवंबर 2023 – सौभाग्य सुंदरी तीज

गुरुवार , 30 नवंबर 2023 – संकष्टी चतुर्थी


Kartik मास के विषय मैं अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:* Kartik Mas2023 का क्या महत्व है?
ए: Kartik Mas 2023 अत्यधिक आध्यात्मिक महत्व रखता है, अनुष्ठानों और तपस्या के माध्यम से भक्ति और आत्म-खोज को बढ़ावा देता है।

प्रश्न:Kartik Mas 2023 कब प्रारंभ होगा?
ए: Kartik Mas 28 अक्टूबर, 2023, शनिवार को शुरू होता है, जो एक महीने तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है।

प्रश्न: Kartik Mas स्नान क्या है?
ए: कार्तिक स्नान एक पवित्र परंपरा है जहां भक्त Kartik Mas के दौरान अपनी आत्मा को शुद्ध करने के लिए नदियों में पवित्र डुबकी लगाते हैं।

प्रश्न: कुछ प्रसिद्ध Kartik Mas स्थल कौन से हैं?
ए: वाराणसी, मथुरा और अयोध्या Kartik Mas उत्सव के उत्साह का अनुभव करने के लिए प्रसिद्ध स्थान हैं।

प्रश्न:परिवार Kartik Mas कैसे मनाते हैं?
ए: परिवार दीप जलाकर, पूजा (अनुष्ठान) करके, उपवास करके और हार्दिक शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करके Kartik Mas मनाते हैं।

प्रश्न: Kartik Mas उत्सव की सांस्कृतिक विविधता क्या है?
ए: Kartik Mas उत्सव क्षेत्रीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करता है।


निष्कर्ष :

अंत में, Kartik Mas 2023 हमें आध्यात्मिक विकास, भक्ति और आत्म-खोज की यात्रा पर निकलने के लिए प्रेरित करता है। जैसे ही हम ज्ञान के दीपक जलाते हैं, उपवास के माध्यम से अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं और प्रार्थना में डूब जाते हैं, यह पवित्र महीना हमें परमात्मा से जुड़ने और धार्मिकता का मार्ग अपनाने का अवसर प्रदान करता है। आइए हम Kartik मास के हर पल को संजोएं और बेहतर इंसान बनकर उभरें।

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कार्तिक मास 2023 : जानिए कार्तिक मास में २१ आरतिया कैसे करे(Kartik month 2023: Know in Kartik month 21 How to do Aartiya )

कार्तिक मास 2023

कार्तिक मास में की जाने वाली आरतियों का महत्व:

कार्तिक मास विशेष रूप से आरतियों के आयोजन के लिए प्रसिद्ध है। इस मास में अनेक प्रकार की आरतियाँ की जाती हैं, जो भगवान की पूजा का अद्वितीय तरीके से हिस्सा बनती हैं। ये आरतियाँ भगवान की महिमा, कृपा, और आशीर्वाद की प्रकटीकरण करती हैं और भक्तों को आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर करती हैं।

कार्तिक मास में कुल २१ आरतियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें हर दिन एक आरती होती है। यह आरतियाँ भगवान के विभिन्न रूपों, विशेषताओं और गुणों की महिमा को प्रकट करती हैं और भक्तों को उनके आदर्शों का पालन करने के लिए प्रेरित करती हैं। इन आरतियों का आयोजन भक्तों की भाग्यशाली जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

ये आरतियाँ सुबह और शाम के समय किया जाता है, जिन्हे बोलकर भक्त भगवान की आराधना करते हैं और उनके प्रति अपनी विशेष भक्ति और समर्पण प्रकट करते हैं। इन आरतियों में विशेष रूप से दीपक, फूल, धूप, चमकते हुए आभूषण, और संगीत का महत्व होता है।

कार्तिक मास में आरतियों के आयोजन से भक्तों का मानसिक और आध्यात्मिक संबंध और भी मजबूत होता है। इन आरतियों की मध्यम से भक्त अपने जीवन को उद्धारणीय दिशा में दिशा तय कर सकते हैं और सही मार्ग पर चलने के लिए प्रामाणिक प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं।तो चलिए शुरू करते है कार्तिक मास की 21 आरतियो  का सफर पहली आरती के साथ…….

कार्तिक मास 2023
कार्तिक मास 2023

Table of Contents

कार्तिक मास की पहली आरती

आरती गणेश जी

सते सवेले तारा दी छा विच कार्तिक स्नान करो

सते सवेले तारा दी छा विच तुलसा दा मंगल गाओ

आरती गणेश जी की

जय गौरी नंदा , प्रभु जय गौरी नंदा

गणपति आनंद कंदा , मैं चरनन वंदा

1. सूंड सुंडाला , नेत्र विशाला कुण्डल छणकंदा

बावाच बाजु बंदा , पौची निरखंदा

जय गौरी नंदा , प्रभु जय गौरी नंदा

गणपति आनंद कंदा , मैं चरनन वंदा

2.  शीश मुकुट सोहन्दा , माल तिलक चंदा

केसर चन्दन सजदा , सिंदूर बिन्दा

जय गौरी नंदा , प्रभु जय गौरी नंदा

गणपति आनंद कंदा , मैं चरनन वंदा

3. मूषक वाहन राजत , गौरी पुत्र आनन्दा

रिद्धि सिद्धि चवर ढुरावण , खावे मोदंदा

जय गौरी नंदा , प्रभु जय गौरी नंदा

गणपति आनंद कंदा , मैं चरनन वंदा

4.  तन मन धन नाल करा आरती , मैं मति मंदा

केहदा  माधव दास , कट्टो याम दा  फन्दा

जय गौरी नंदा , प्रभु जय गौरी नंदा

गणपति आनंद कंदा , मैं चरनन वंदा

बोलो गणेश जी महाराज की जय

कार्तिक मास 2023

कार्तिक मास की दूसरी आरती

आरती तुलसा  जी की

जय तुलसा माता , सब जग की सुख दाता

1. सब योगो से ऊपर , सब लोगो से ऊपर

रुज  से रक्षा करके , भाव त्राता

जय तुलसा माता , सब जग की सुख दाता

2. वटु पुत्री है शयामा , सुर बल्ली है ग्राम्या

विष्णु प्रिये  तुमको सेवे , सो नर  तर जाता

जय तुलसा माता , सब जग की सुख दाता

3. हरी के शीश विराजत , त्रिभुवन से हो वन्दित

पतित जनो की तारिणी , तुम हो विख्याता

जय तुलसा माता , सब जग की सुख दाता

4. लेकर जनम विजन मैं , आई दिव्या भवन मैं

मानव लोक तुम्ही से , सुख सम्पति पता

जय तुलसा माता , सब जग की सुख दाता

5. हरी को तुम अति प्यारी श्याम वरुज कुवारी

प्रेम अजब है उनका , तुमसे कैसा नाता

जय तुलसा माता , सब जग की सुख दाता

बोलो तुलसी माता की जय


कार्तिक मास की तीसरी आरती

आरती सालिग्राम जी की

सालिग्राम सुनो जी विनती मेरी

द्वारिका नाथ जी काटो जी विपदा मेरी

दे वरदान दया कर  पावा

1. प्रात समय उठ मंगल गावा, प्रेम सहित स्नान करावा

चन्दन धुप दीप तुलसीदल, अपने प्रभु न मैं तिलक लगवा

सालिग्राम सुनो जी विनती मेरी

द्वारिका नाथ जी काटो जी विपदा मेरी

दे वरदान दया कर  पावा

2. षट रस भोजन छतरी अमृत, लाये भोग प्रसाद मैं पावा

मथुरा जी दे पेड़े मंगावा, कपिला गऊ डा मैं दूध मंगावा

अपने प्रभु न मैं भोग लगावा

सालिग्राम सुनो जी विनती मेरी

द्वारिका नाथ जी काटो जी विपदा मेरी

दे वरदान दया कर  पावा

3. भव सागर बेडा पार उतारो, देवन के दरबार मैं जावा

माधव दास तेरी हस रस जोड़ी, कर कर अर्जा मैं भुल्ला बक्शावा

सालिग्राम सुनो जी विनती मेरी

द्वारिका नाथ जी काटो जी विपदा मेरी

दे वरदान दया कर  पावा

4. बार बार मैं करा बेनती, दे वरदान दया कर पावा

जितने पाप किये दुनिया मैं, कर कर अर्जा मैं भुल्ला बक्शावा

सालिग्राम सुनो जी विनती मेरी

द्वारिका नाथ जी काटो जी विपदा मेरी

दे वरदान दया कर पावा

बोलो तुलसी माता की जय

कार्तिक मास की चौथी आरती

आरती तुलसा  जी की

नमो नमो तुलसी महारानी,

नमो नमो ब्रहमे दी जाई, नमो नमो बैकुंठो आई,

नमो नमो बैकुंठी डेरा, नमो नमो मेरे हर जी दा फेरा,

नमो नमो मेरे हर जी दी दासी , नमो नमो पूरण अविनाशी,

नमो नमो कट्टो यम्मा वाली फाँसी

1 आणो रम्बा खट्ठो टोई , तुलसा महाराणी प्रकट होई।

2 आणो रम्बा करो क्यारी , तुलसा ठाकुर बहुत प्यारी।

3  जँहा मेरी तुलसा छोड़िया लँगरा, ठाकुर जी नू पईया खबरा।

4 जँहा मेरी तुलसा होई दुपत्री, पुजा करदे बामण खत्री,

बामण खत्री सेल सुनारे।

5 जँहा मेरी तुलसा बधीये अंगूरी, ठाकुर जी दी इच्छया पूरी,

अख विच कजला ते माँग सिंदूरी।

6. बाहर थिंदीया राहया झाइया, अंदर मेरी तुलसा बैठी है माइया।

7.  जँहा मेरी तुलसा आइये डेढ़ी , रल मिल सखियां खोली मेढी।

8. बाहर वगडे उरे ढुरे, अंदर मेरी तुलसा पहनदी है चुड़े।

9. बाहर वगडे छेणे मेणे, अंदर मेरी तुलसा पहंदी है गहणे।

10. हुणता वृंदावनी थयी सयानी, ठाकुर जी दे तन मन भाणी।

11. जँहा मेरी तुलसा डितीया लावा, कोल बैठ के हर यश गावां।

12. जंहा मेरी तुलसा पाईये डोले, सब दुनिया जयकारे बोले।

13. जहां मेरी तुलसा वयाह  घर आई, मात यशोदा झलली है बधाई।

तुलसा महाराणी की जय

कार्तिक मास

कार्तिक मास की पांचवी आरती

आरती तुलसा रानी की

पंजवी बिन्दाबनी तेरी आरती आरती,

जनम लत्थे पाप रे पाप रे,

देवकी जाया देवकडा यशोदा जाया कान्हा रे कान्हा रे,

सोना रूपा दाना रे दाना रे,

सोना रुपा सुलखणा, साडे घर आया श्री भगवान,

साडे घर आया गोपीयां दा कान्ह, मात यशोदा नंद दी राणी,

खीर कटोरे गडवे पाणी, झोल झोल पीवे मेरी तुलसा राणी,

अटकी मटकी घर नू आईया, नौ सौ गोपीयां वर नू आइया,

शंख वजे घडियाल वजे, ता ता मेरा ठाकुर जगगे,

आणो कुंजी खोलो दरबार,

मैं वी वैसा स्वर्ग द्वार, स्वर्ग द्वार दा पाणी मिट्ठा,

धन तुलसा तेरा मुखडा डिट्ठा,

तुलसा महाराणी की जय


कार्तिक मास की छिवि आरती

आरती तुलसा रानी की

छींवी आरती करा प्रसाद, राज करे मेरा कृष्ण मुरार,

राज करे मेरा देवकी नंदा, मोहन मथुरा वासदेव,

कान्हा गउआ चरेन्दा, कार्तिक धावन चल्लीया

मा जन्दरे चुरे  राधा कृष्ण बुलाईया

मान उन्हा दे पूरे, करा माधव तेरी आरती

वंजा गंग द्वारे, चिटडे चावल श्री कृष्ण दे

वंजा हर दरबारे, डोडा खोडा आंवला

दही डबोदर सांवला, दही डबोदर चितकरा

मैं हर दी पौडी नित करा, मैं कोल खलिती राजा

कोल बहिती

मैं पुजा हर दी पुतली, मैं पुजा हर दी काया

निरंजन तेरी छाया, मैं स्वर्ग द्वार जावा ,

स्वर्ग द्वार दा पाणी मिठ्ठा,धन तुलसा तेरा मुखडा डिठ्ठा

तुलसी महाराणी की जय


कार्तिक मास की सातवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

सतवी आरती कर प्रसाद, राज करे मेरा कृष्ण मुरार।

राज करे मेरे सिर दा सांई, ओ खट्टे मे बैठी खांई।

मैं पूजा नारायण साईं लाई लोटी गुजरी,

मनाओ सुरसती आओ वेखो सईंया।

नारायण तुरट्टा हर नारायण, हर नारायण गोविन्दा।

मैं पुजा मन दी चिंता,

मैं पुजा डोडा आंवला नारायण पुजा सांवला।

हर किट्टा हर किट्टा मैं वेद कोई ना डिठ्ठा,

श्रीकृष्ण अखियाँ डिठ्ठा

तुलसा महाराणी की जय


कार्तिक मास की आठवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

पहलीये पोडिये आ चढ़ भाई नी, मैं मुख देखा यादव राई नी

उठ कल्याणया राणया जोडी़ नी, राधिका प्यारी ले अँचला जोड़ी नी

करले आरती राधिका सोहे नी, मंगले आरती श्री कृष्ण मन मोहे नी।

दुजिये पोडिये आ चढ़ माई नी, मैं मुख वेखा यादव राई नी

उठ कल्याणया राणया जोड़ी नी, राधिका प्यारी ले अँचला जोड़ी नी

करले आरती राधिका सोहे नी, मंगले आरती श्री कृष्ण मन मोहे नी।

तीजीये पोडिये आ चढ़ भाई नी, मैं मुख वेखा यादव राई नी

उठ कल्याणया राणया जोड़ी नी, राधिका प्यारी ले अँचला जोड़ी नी

करले आरती राधिका सोहे नी, मंगले आरती श्री कृष्ण मन मोहे नी

बोलो तुलसा महाराणी की जय


कार्तिक मास की नवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

सुण राधा प्यारिये नी असी गोविन्द डिठ्ठा, पैर रतिया खडावा खडकेन्दडा डिठ्ठा,

हथ खासे दा चोला गल पेन्दडा डिठ्ठा, हथ पिताम्बरी धोती गंगा धावन्दा डिठ्ठा,

हथ तिलक कटोरियाँ तिलक लेन्दडा डिठ्ठा, हथ गीता दी पोथी पडेन्दडा डिठ्ठा,

हथ मोतिया दी माला भजन करेन्दडा डिठ्ठा, कन सोने दे कुन्डल लडकेन्दडा डिठ्ठा,

हथ सोने दी बंसी वजेन्दडा डिठ्ठा, मुख पाना दे बीडे चबेन्दडा डिठ्ठा,

हथ सोने दिया छाँम्बा लिशकेन्दडा डिट्ठा, सुन राधा प्यारिये नी असी गोविन्द डिठ्ठा |

बोलो तुलसा महाराणी की जय


कार्तिक मास की दसवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

कोरे डोले दही जमावा, अच्छी अच्छी दही जमावा।
खावे नन्द किशोर वारी वण खावे जुगलकिशोर
मेरा चित चरणा दे कोल।,

अच्छी अच्छी दही विलोसा,
गा दा संग ना छोड, तीर्था दा पन्द ना छोड,
सोणे दा लड ना छोड़, सोणा वन्ज पुचेसिया तोड़,
मेरा चित चरणा ।

1. चन्दन दी मधाणी बणयो,काले र्सप दी डोर वारी वण काले र्सप दी डोर

मेरा चितख चरणा दे कोल ।

2. मात यशोदा दहीयाँ विलोवे, खावे नन्दकिशोर वारी वण खावे जुगलकिशोर

मेरा चित चरणा दे कोल।

3. रोटी डेसा माखण डेसा, आ बा मेरे कोल वारी वण आ बा मेरे कोल

मेरा चित चरणा दे कोल।

4. चन्दन दा पिंगुडा बणया, लाल पट्टे दी डोर वारी वण लाल पट्टे दी डोर

मेरा चित चरणा दे कोल।

5. मात यशोदा झूले डेव,  झुले नन्दकिशोर वारी वण झुले जुगलकिशोर

मेरा चित चरणा दे कोल।

6. श्याम साडा गउँआ चरावे, बछडे डेन्दा छोड वारी वण बछड़े डेन्दा छोड़

मेरा चित चरणा दे कोल।

7. रतडी खाट चन्दन दे पावे, लेटे नन्द किशोर वारी वण लेटे जुगलकिशोर

मेरा चित चरणा दे कोल ।

8. श्याम साडे गुडडी चाडी, चढ़ गई इन्द्रलोक वारी वण चढ़ गई इन्द्रलोक

मेरा चित चरणा दे कोल।

9. लाटू डेसा डोर डेसा, खेडे नन्दकिशोर वारी वण खेडे जुगलकिशोर

मेरा चित चरणा दे कोल ।

10. श्याम साडा रास रचाव, राधा उसदे कोल वारी वण राधा उसदे कोल

मेरा चित चरणा दे कोल।

11. आणो बही करो लेखा, मेरे अवगुण कोई ना फोल वारी वण अवगुण कोई ना फोल

मेरा चित चरणा दे कोल।

12. धर्म दी वलटोई चाढ़ो, पाप डेसा लोड वारी वण पाप डेसा लोड

मेरा चित चरणा दे कोल

अच्छी अच्छी दही विलोसा, गा दा संग ना छोड़,

तीर्था दा पन्द ना छोड़, सोणे दा लड ना छोड़,   

सोणा वन्ज पुचेसिया तोड़

बोलो तुलसा महाराणी की जय


कार्तिक मास की गयारहवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

बुढ्ढी  माई  बुढ्ढी  माई  मै वी न्हायी तू वी न्हायी,

अग्गो  मिलया कान्ह कन्हाई।

पापा नू घटेन्दी आई, पुन्ना  नू  वधेन्दी आई ।

कुतडा तू भौके ना, बिलडा तू चौके ना।

कावा चुन्ज मारे ना, सप्पा डंग मारे ना।

गवान्डन बुआ ताडे ना, तीतर वितर लिखे ना।

धर्मराज लेखा पुच्छे ना, मैं वी वैसा स्वर्ग द्वार।

स्वर्ग द्वार दी पोडिया लंघ खलोसा पार।

चिटडे चावल मैं डेवा श्री कृष्ण दे दरबार।

बोलो तुलसा महाराणी दी जय


कार्तिक मास की बारहवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

सीता पतियो राम रघु वसियो राम

मेरे मन मे बसो मेरे ह्रदय मे बसो

1.किडडु आईये तुलसा, ते किडडु आया राम ,ते किडडु आया मेरा सालीग्राम,

वाह वाह किडडु आया मेरा गोपीयां दा कान्ह।

घर घर आई तुलसा, अयोध्या आया राम, बद्रीनारायण मेरा सालीग्राम,

वाह वाह बद्रीनारायण मेरा गोपीयां दा कान्ह।

2. कित्थे बावे तुलसा ते कित्थे बावे राम, कित्थे बावे मेरा सालीग्राम

वाह वाह कित्थे बावे मेरा गोपीयां दा कान्ह।

गमले बावे तुलसा, सिहासन बावे राम, सुच्चे रूमाले मेरा सालीग्राम,

वाह वाह सुच्चे रूमाले मेरा गोपीयां दा कान्ह।

3. क्या खावे तुलसा ते क्या खावे राम, क्या खावे मेरा सालीग्राम,

वाह वाह क्या खावे मेरा गोपीयां दा कान्ह।

लड्डु खावे तुलसा ते पेडा खावे राम, नुकती जलेबी  मेरा सालीग्राम,

वाह वाह नुकती जलेबी मेरा मेरा गोपीयां दा कान्ह।

4. क्या ओढे ते क्या ओढे राम, क्या ओढे मेरा सालीग्राम,

वाह वाह क्या ओढे मेरा गोपीयां दा कान्ह।

शाल ओढे तुलसा दुशाला ओढे राम,काली कमलीया मेरा सालीग्राम,

वाह वाह काली कमलीया मेरा गोपीयां दा कान्ह।

5.कित्थे सम्मे  तुलसा ते कित्थे सम्मे राम, कित्थे सम्मे मेरा सालीग्राम ,

वाह वाह कित्थे सम्मे मेरा गोपीयां दा कान्ह।

आंगन सोवे तुलसा चबारे सम्मे राम, शीश महल मेरा सालीग्राम

वाह वाह शीश महल मेरा गोपीयां दा कान्ह।

सीता पतियो राम रघु वसियो राम, मेरे मन मे बसो मेरे ह्रदय मे बसो।

बोलो तुलसा महाराणी की जय


कार्तिक मास की तेरहवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

पहलीये पोडिये गोविन्द आया नी,पहलीये पोडिये राम साईं आया नी।

1. राधिका प्यारिये ने कुन्डा लहाया नी, करले आरती राधिका सोहे नी,

मंगले आरती श्री कृष्ण मन मोहे नी।

2. दुजिये पोडिये गोविन्द आया नी,दुजिये पोडिये राम साई आया नी।

राधिका प्यारिये ने शीश नवाया नी,करले आरती राधिका सोहे नी,

मंगले आरती श्री कृष्ण मन मोहे नी

3. तीजीये पोडिये गोविन्द आया नी, तीजीये पोडिये राम साई आया नी।

राधिका प्यारिये ने स्नान कराया नी,करले आरती राधिका सोहे नी,

मंगले आरती श्री कृष्ण मन मोहे नी।

4.चौथीये पोडिये गोविन्द आया नी, चौथीये पोडिये राम साई आया नी।

राधिका प्यारिये ने आसन विछाया नी,करले आरती राधिका सोहे नी,

मंगले आरती श्री कृष्ण मन मोहे नी ।

5.पंजवीये पोडिये गोविन्द आया नी,पंजवीये पोडिये राम साई आया नी।

राधिका प्यारिये ने तिलक लगाया नी, करले आरती राधिका सोहे नी,

मंगले आरती श्री कृष्ण मन मोहे नी।

6. सावणे मासा लुगडा आया नी, सावणे गोये दामे चौकडा पाया नी,

पतली थाली उजली कोली,विच विच राधिका मिश्री घोली,

उठ मेरी राधिका करले रसोई, छतरी भोजन अमृत होई।

7. सतवीये पोडिये गोविन्द आया नी,सतवीये पोडिये राम  साई आया नी।

राधिका प्यारिये ने भोग लगाया नी ,करले आरती राधिका सोहे नी,

मंगले आरती श्री कृष्ण मन मोहे नी।

बोलो तुलसा महाराणी की जय


कार्तिक मास की चौदहवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

1. ठाकुर आन्दा टिका जुडा, उठ मेरी वृन्दावनी मत्थे उत्ते ला,

मत्थे उत्ते ला सोणे श्याम नू विखा, वृन्दावन विच नचदी आ ।

2. ठाकुर आन्दा नथनी जुडा, उठ मेरी वृन्दावनी नक विच पा,

नक विच पा सोणे श्याम नू विखा, वृन्दावन विच नचदी आ।

3. ठाकुर आन्दा कुन्डल जुडा,उठ मेरी वृन्दावनी कन विच पा,

कन विच पा सोणे श्याम नू विखा, वृन्दावन विच नचदी आ।

4. ठाकुर आन्दा हार जुडा, उठ मेरी वृंदावनी गल विच पा,

गल विच पा सोणे श्याम नू विखा, वृन्दावन विच नचदी आ ।

5. ठाकुर आन्दा कंगन जुडा, उठ मेरी वृन्दावनी हथा विच पा,

हथा विच पा सोणे श्याम नू विखा, वृन्दावन विच नचदी आ।

6. ठाकुर आन्दा वेष सिवा,उठ मेरी वृन्दावनी हँस हँस पा,

हँस हँस पा सोणे श्याम नू विखा, वृन्दावन विच नचदी आ ।

बोलो तुलसा महाराणी दी जय


कार्तिक मास की पंद्रहवी आरती

आरती तुलसा रानी की

तुलसा राणी राह निहारे चढ़ महल चबारे श्याम सुंदर दे आवण नू।

1.हरा भरा इक बाग लगाया, विच विच तुलसा कुआँ खटाया, श्याम सुंदर दे धावण नू।

तुलसा राणी …..

2.पीले पीले कपड़े मंगाये, श्याम सुंदर दे बागे  बणाये,

विच विच सीप्पी सितारे लाये, श्याम सुंदर दे पावण नू।

तुलसा राणी….

3.चन्दन चौकी आसन विछाया, फुल्ला दा हार बणाया,

श्याम सुंदर दे पावण नू।

तुलसा राणी….

4.सिर ते बाँधे जरी दा पटका, विच विच मोर दा पंख अटका,

सावली सुरत सजावण नू

तुलसा राणी…

5.दुध कटोरा विच मक्खन दा रोडा विच विच तुलसा मिश्री नू घोला,

श्याम सुंदर दे खावण नू।

तुलसा राणी….

6.रेशम दी डोरी, झूला बँधे राधा गौरी,

श्याम सुंदर दे झूलण नू।

तुलसा राणी …..

7.झालर वाला पलंग विछावे,रूकमण राणी पंखा

झल्ले,श्याम सुंदर दे सम्मण नू।

तुलसा राणी….

बोलो तुलसा महाराणी की जय


कार्तिक मास की सोलहवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

आरती नन्द जी दे लाल ,के मदन गोपाल मैं गावा कुंज गली।

1.मोर मुकुट माथे तिलक विराजे, गल वैजन्ती माला साजे,

घुंघर वाले वाल  के मदन गोपाल मैं गावा कुंज गली

2.पीला पिताम्बर गल विच सोहे, सुन्दर छवि मेरे मन नू मोहे,

तू  दीनदयाला  के मदन गोपाला मैं गावा कुंज गली

3.तट यमुना ते गउआ चरावे, साँझ पडे  गउआ  घेर ले आवे,

करदा है टालम टोल मात यशोदा दा लाल,

के मदन गोपाल मैं गावा कुंज गली।

4. नरसी भगत दी हुंडी तारी,श्यामल श्याम गये मुरारी,

भक्ता दे प्रतिपाला  के मदन गोपाला मै गावा कुंज गली।

5. दास दी अरज गुजारी, दर्शन दो मेरे बाँके बिहारी,

दासी कर रही सवाल के मदन गोपाल मैं गावा कुंज गली।

तेरी आरती नन्द जी लाल , के मदन गोपाल मै गावा कुंज गली।

बोलो तुलसा महाराणी दी जय


कार्तिक मास की सत्रहवीं आरती

आरती तुलसा रानी की

कौन दिशा जगन्नाथ स्वामी, कौन दिशा रघुनाथ स्वामी,

कौन दिशा रण छोड़ टीकम ,कौन दिशा बद्रीनाथ है।

पुरब दिशा जगन्नाथ स्वामी, पश्चिम दिशा रघुनाथ है,

उत्तर दिशा रण छोड़ टीकम, दक्षिण दिशा बद्रीनाथ है।

चलो रे साधु चलो रे सन्तो, गंगा द्वार नहाइये,

दर्शन कर श्री बद्रीनाथ का आवागमन मिटाइये।

2.कौन करण जगन्नाथ स्वामी, कौन करण रघुनाथ स्वामी है,

कौन करण रण छोड़ टीकम, कौन करण बद्रीनाथ है।

योग करण जगन्नाथ स्वामी, भोग करण रघुनाथ स्वामी,

राज करण रण छोड़ टीकम, तप करण बद्रीनाथ  है।

चलो रे साधु चलो रे सन्तो गंगा द्वार नहाइये,

दर्शन कर श्री बद्रीनाथ का आवागमन मिटाइये।

3.क्या चढ़त जगन्नाथ स्वामी, क्या चढ़त रघुनाथ स्वामी,

क्या चढ़त रण छोड़ टीकम, क्या चढ़त बद्रीनाथ है।

अटका चढ़त जगन्नाथ स्वामी, गंगा चढ़त रघुनाथ है,

माखन मिश्री रण छोड़ टीकम, फल चढ़त बद्रीनाथ है।

चलो रे साधु चलो रे सन्तो गंगा द्वार नहाइये,

दर्शन कर श्री बद्रीनाथ का आवागमन मिटाइये।

4.क्या देत जगन्नाथ स्वामी,क्या देत रघुनाथ स्वामी,

क्या देत रण छोड़ टीकम ,क्या देत बद्रीनाथ है।

पट देत जगन्नाथ स्वामी, वैधय देत रघुनाथ है,

छाप देत रण छोड़ टीकम, कंगन देत बद्रीनाथ है।

चलो रे साधु चलो रे सन्तो गंगा द्वार नहाइये,

दर्शन कर श्री बद्रीनाथ का आवागमन मिटाइये।

बद्री बिसाल की अजब  महीमा गायेगा सो पायेगा,

पढ़न वाले दा बैकुन्ठ वासा सुणन वाला फल पायेगा।

बोलो तुलसा महाराणी दी जय


कार्तिक मास की अठरहवी आरती

आरती तुलसा रानी की

1. कन्या कुआरी दी सेवा किजिये, मात पिता दी सेवा किजिये,

स्वामी दी सेवा किजिये।

2.गौमाता दी सेवा किजिये, स्त्री दा जामा न लिजिये,

पुरुषे दा जामा लिजिये।

3.तुलसा माता सबदी दाता, चटके दी चाल दिजिये,

पटके दी मौत दिजिये, श्री कृष्ण दा कन्धा दिजिये।

4.मेरा जन्म मरण कट लिजिये, प्रभु मे तेरी करा सेवा,

सेवा दा फल दिजिये।

5. पहलडा पुजा ता भंगडा चुक्के, दुजडा पुजा ता डलिद्र नस्से,

मस्तक पुजा ता आवे सन्तोष, बिन्द्राबनी सानू तेरी ओट ।

बोलो तुलसा महाराणी की जय

कार्तिक मास की उन्नीसवीं आरती

कार्तिक मास की बीसवीं आरती

कार्तिक मास की इक्कीसवीं आरती

समापन

कार्तिक मास में आरतियों का आयोजन भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण की प्रकटीकरण है। ये आरतियाँ भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन करती हैं और उन्हें उनके आदर्शों के प्रति प्रेरित करती हैं। इस कार्तिक मास में आप भी इन आरतियों का अद्भुत महत्व समझकर उनमें भाग ले सकते हैं और आध्यात्मिक उन्नति की ओर एक कदम बढ़ा सकते हैं।

कार्तिक मास 2023कार्तिक मास 2023 : जानिए कार्तिक मास में २१ आरतिया कैसे करे(Kartik month 2023: Know in Kartik month 21 How to do Aartiya )